अरे सुन ना मेरी जान…कुछ मेरे खास दोस्त आ रहे हैं…प्लीज यार जा..
अरे नहीं बाबा..तुम्हारा क्या काम है जो. तुम्हारे दोस्तों को भी… और राज भी तो होगा उसका क्या… मम्मी ने कहा..
जा फिर ना मन मेरी बात.. मैं अभी का अभी निकल जाता हूं…
अरे गुस्सा ना हो पर.. तुम भी तो सोचो..
देख उनको खुश करना बहुत जरूरी है…
तो माई काया करूं.. कोई बाजार वाली दिला दो..
तुझे जो करनी है कर… आज से तेरा मेरा ख़तम… और गुस्सा के सलीम वहां से चला गया…
एक दिन हुआ… 2 दिन हुसा सलीम नहीं आये। तो मम्मी ने मुझे सलीम के यहाँ भेजा… तो पता चला वो घर पर नहीं है…
देखते-देखते.. पूरे 15 दिन होंगे… मम्मी का बुरा हाल हो गया था… बात-बात पर गुस्सा हो जाती है..
तभी छत से मम्मी ने सलीम को उसकी छत पर देखा… आवाज दी पर वो जान के आंसू जरूर दिया..
मम्मी जान कर इसे करने लगी.. फिर सलीम को दिखा कर डॉगी बन गई।
फिर सलीम देख कर हंसने लगा तो उठी और कान पाकर कर सॉरी बोली।
सलीम उस दिन शाम को ऐ तो और संत माई उनके 3 और लोग ऐ थे.. और एक बारा सा बकरा भी लेके ऐ थे..
अरे तुम्हें मालुम नहीं भाभी कितना मस्त बनाती है…आज रात यहीं रुकेंगे…राज चल बकरा..तैयार है हलाल को…फिर सलीम ने मम्मी के कानो माई कुछ कहा…तो मम्मी सरमा गई…
माई बकरे को लेके पिचे की ट्रैप गया और फिर सलीम ने कुछ मन कहा, मैं बोलते हुए बकरे को तैयार किया।
सुनो तुम लोग इसे तैयार करो तब तक मैं अंदर से मिल के आता हूं..
राजू.. एक काम करो पकारो इसको.. और फिर उन्हें.. बकरी की कुएबानी दी..
और अंकल लोग क्लीन करने लगे बाकरे को.. तभी मम्मी और सलीम अंकल बाहर आये…
मम्मी को देख कर सबका मुंह खुला का खुला रह गया.. मम्मी ने ब्लैक कलर की नेट वाली मैक्सी डाली थी.. इतनी खुबसूरत लग रही थी कि मेरा भी मूड खराब हो गया था..
सलीम- अरे जल्दी जल्दी काम करो.. शुद्ध समय इसी में लगावो गे क्या.. और मुस्कुराने लगे..
अरे अरुण का क्या किये…निकलो खाना है…
यार सलीम ये तो बस 2 है.. कोई ना आधा आधा करो.. फिर अंकल ने हाफ करके दिया..
मम्मी.. देखूं मुझे कैसा लगता है..
एक अंकल ने मम्मी को अरू दिया.. अरे इतना नहीं.. थोड़ा सा दीजिए.. मम्मी ने जब मुंह लिया तो फले फिर चबा के खाने लगी..
सलीम ने पूछा कैसा लगा मेरी जान…
मम्मी – थोरा नमकीन और लीबी लीबी..
सभी हंसने लगे.. तुम्हें तो नमकीन भी पसंद है और बाकी भी..
और इतना खा के सलीम ने बोला कि चलो सब अंदर आजवो काफी रात हो चुका है..
जब अंदर जा रहे थे तो सलीम ने अपना हाथ मम्मी की गांड पर रखा था.. और मम्मी नाटक करती जा रही थी।
यार सलीम भाई जान भी क्या माल पता रखा हाय.. मेरा तो अभी से टाइट हो गया.. फिर सभी हंसने लगे..
अरे जान आप क्यों थक रही हो.. इन्हें आज बनाने दो.. तुम आराम करो..
और खा के सलीम ने मम्मी को भगवान से उठा लिया..
अरे.. सुनो ना.. जरा अपनी सदी वाली ड्रेस डालो ना..
अरे क्या तुम भी वो अब कहां आने वाली है.. मम्मी गुस्सा रही थी।
नहीं कल मैं पका डाल लुंगी..
अच्छा कल कहीं चले गये तो..
मम्मी के होस उर गे.. नहीं प्लीज़ ऐसा ना खो..
अरे कोई नहीं जान.. हम अभी कहीं नहीं जा रहे.. तुम बेकार परेशान ना हो.. कह कर सलीम ने मम्मी की जोर से गले से लगाया और ऊपर उठा लिया..
मम्मी की मैक्सी और भी ऊपर उठ गई और उनकी लाल पैंटी दिख गई
तभी एक अंकल ऐ और फाट से पैंटी निकल दी..
सईलम वैसे ही मम्मी को पकरे रहे..
फिर एक अंकल उम्र आगे और एक पीछे..
सलीम ने मम्मी को भगवान माई उठा के वही बैठ गए..
फिर कान माई बोले.. जानू आज कुछ ना खाँसा बस संत दो.. अभी तक का बेस्ट होगा..