दोस्तो, मेरा नाम सोनू है, मैं उत्तर प्रदेश से हूँ,
यह कहानी मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड के बीच हुई चुदाई की कहानी है,
आइए पहले आप सभी को मैं अपनी गर्लफ्रेंड का परिचय दे देता हूँ,
मेरी गर्लफ्रेंड की हाइट 5 फुट 2 इंच है और उसकी फिगर 30-28-32 की है,
गर्लफ्रेंड का नाम शिवानी है मगर मैं उसे प्यार से शिवि बुलाता हूँ,
हालांकि उसका यह नाम बदला हुआ है,
मैं और मेरी गर्लफ्रेंड पहली बार कॉलेज में मिले थे,
अभी हम दोनों बी,एड, के चौथे सेमेस्टर में हैं,
हुआ यूं कि मैं कॉलेज में किसी को नहीं जानता था,
हमारे कॉलेज का एक व्हट्सऐप ग्रुप बना हुआ है,
मैं उस ग्रुप में किसी लड़की का नम्बर खोज रहा था,
अनजाने में मैंने एक लड़की के वाट्सैप्प पर मैसेज भेज़ दिया,
उसका जवाब वाला मैसेज 3 घंटे के बाद आया,
यह शिवि थी,
शिवि- आप कौन?
मैं- मेरा नाम सोनू है,
शिवि- मेरा नम्बर कहां से मिला?
मैं- कॉलेज ग्रुप से लिया है,
शिवि- क्या काम है … बोलो?
मैं- आपने प्रायोगिक कार्य कर लिया है?
शिवि- हां, पर अभी तक तुम क्या कर रहे थे … सो रहे थे क्या?
मैं- नहीं … दरअसल मुझे पता नहीं था कि क्या टॉपिक मिला है?
शिवि- ठीक है, मैं बता देती हूँ, पर अब मैसेज मत करना वरना ब्लॉक कर दूंगी,
इतना कह कर वह चली गई,
एक बात तो है, लड़कियां जो कहती हैं, वह कर ही देती हैं,
अगली सुबह मैंने उसे वापस मैसेज किया- गुड मॉर्निंग!
शिवि- बोले थे ना … मैसेज मत करना!
बस 5 सेकंड के बाद उसने मुझे ब्लॉक कर दिया,
इसके 4 महीने बाद उसी का मैसेज आया,
शिवि- हैलो!
मैं- हाय,
शिवि- यार, तुमने दोबारा मैसेज ही नहीं किया!
मैं- आपने ब्लॉक किया हुआ है, तो कहां से करूँ?
शिवी- लड़के तो बहुत से सिम कार्ड रखते हैं, तुमने ही मैसेज नहीं किया!
मैं- तो मैं आपको परेशान करने थोड़ी आया था … मुझे तो नोट्स चाहिए थे,
शिवि- लड़के बहुत परेशान करते हैं तो मुझे लगा कि तुम भी उसी में से एक हो, इसलिए मैंने तुम्हें ब्लॉक कर दिया था, पर मुझको लग रहा है कि तुम अलग हो!
मैं- पता नहीं, जैसा आप समझो,
शिवि- आप अच्छे लड़के लग रहे हो,
मैं- तुमसे आप … ऐसा क्यों?
शिवि- अच्छे लड़कों को आप कह कर बुलाना चाहिए,
ऐसे ही हम लोगों की बातें कुछ महीनों तक चली,
एक दिन कॉलेज से नोटिस आया कि कॉलेज सबको आना है,
उस समय 5 दिन तक लगातार कॉलेज जाना था,
शिवि- यार, आप कॉलेज कैसे जाते हैं?
मैं- बाइक से!
शिवि- बाइक से जा रहे हैं, तो क्या मुझे भी ले चलेंगे आप?
मैं- हां ठीक है,
दोस्तो, जैसा आप सोच रहे हैं इन 5 दिनों में ऐसा कुछ नहीं हुआ,
शिवि पांच दिन बाद बोली- यार, आप बाइक से हमको ले जा रहे थे, आपको कुछ फ़ील नहीं हुआ?
मैं- मैंने आपके बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचा था,
शिवि- मैंने भी नहीं सोची थी, पर आप न मुझे बहुत ही स्मार्ट, हैंडसम और मस्त लगे … क्या मैं आपकी गर्लफ्रेंड बन सकती हूँ?
अभी तक मैंने कुछ सोचा नहीं था कि ऐसा हो जाएगा, उसकी बात सुनकर मेरे भी मन में लड्डू फूटने लगे,
मैंने तुरन्त ही हां कर दिया,
शिवि- आई लव यू!
मैंने भी ‘लव यू टू बेबी’ बोल दिया,
हम दोनों की बातें शुरू हो गई थीं,
कुछ दिनों तक ऐसे ही चला,
एक दिन अचानक से शिवि का सनसनी देने वाला एक मैसेज आया,
शिवि- यार, तुमने कभी चुदाई की है?
मैं- यार, यह तुम कैसी बातें कर रही हो?
शिवि- तुम बच्चे थोड़ी ना हो यार … अगर तुमसे ऐसी बातें अब नहीं करूंगी, तो कब करूंगी?
मैं- मैंने कभी चुदाई नहीं की है,
शिवि- क्या बात कर रहे हो यार … तुमने अभी तक चुदाई नहीं की है, बेबी तुम मेरे साथ चुदाई कब करोगे, मुझे बहुत ही ज्यादा मन हो रहा है,
मैं- चुदाई का मन तो मुझे भी हो रहा है,
वह हंस दी और बोली- चलो प्रोग्राम बनाते हैं,
कुछ समय के बाद एक दिन मेरे मोबाइल पर शिवि का कॉल आया और वह बोली- बाबू, आज मम्मी-पापा और घर के सभी लोग शादी में गए हैं, मैं पेट में दर्द का बहाना बना कर नहीं गई, आज रात को मेरे घर कोई नहीं रहेगा,
मैं आपको बता दूँ कि जब से शिवि ने चुदाई के बारे में बात की थी, तब से ही मैं चुदाई के बारे में गूगल से, यूट्यूब से जानकारी ले रहा था कि पहली बार में चुदाई कैसे करें,
चुदाई से लड़की को कैसे ज्यादा मजा आता है,
ये सब जानकारी जुटाने में एक महीना लग गया था,
आज वह दिन आ गया था जब मैं एक लड़की की चुदाई करूंगा,
मैंने मेडीकल स्टोर से एक पैकेट कंडोम का ले लिया था,
शाम होते ही मैं बाइक से निकला और शिवि के घर की तरफ निकल गया,
6 बजे तक मैं उसके पास पहुंच गया,
शिवि ने दरवाजा खोला और मैं आस पड़ोस वालों की नजरों से बचता हुआ शिवि के घर में अन्दर चला गया,
आज शिवि ने पटियाला सलवार सूट पहना था,
उसने अपना पूरा मेकअप किया हुआ था,
उसके होंठों पर लाल लिपस्टिक उसकी जवानी को और नमकीन बना रही थी,
शिवि की चूचियां इस कदर उभरी हुए लग रही थीं मानो आज उनमें गजब सा उफ़ान आया हुआ हो,
उसके खुले रेशमी बाल हवा में लहरा रहे थे और उनमें से महक तो ऐसी आ रही थी मानो कोई भी लड़का उसकी इस महक का दीवाना बन जाए,
वही हाल मेरा भी था,
मेरे लंड में धीरे धीरे उभार आना शुरू हो गया था,
पर किसी तरह से मैंने अपने आप की असंतुलन की अवस्था को ठीक किया,
शिवि- बाबू खाना में क्या खाओगे?
मैंने उसके चूचे देखते हुए कहा- आज खाने का मूड नहीं है, बस पीने का मन है!
शिवि- अरे बाबू … आज तो मैं खुद पिलाऊंगी, आप ये बताओ डिनर में क्या खाओगे?
मैं- जो मन करे खिला दो … बस अपने हाथ से खिला दो,
हम दोनों ने रात को साथ में मिल कर खाना बना लिया था,
चुदाई का असली मजा तब आता है, जब माहौल शांत हो,
हम दोनों ने भी बिल्कुल जल्दबाजी नहीं की … क्योंकि हमारे पास रात भर का समय था,
हमने प्लान बनाया कि हम साथ में चुदाई के पहले नहाएंगे,
मैंने शिवि के कपड़े उतारना शुरू किए,
पहले उसकी सलवार को उतारा, फिर कुर्ती को हटा दिया,
मां कसम ब्रा और पैंटी में शिवि को देख कर मैं दंग रह गया था कि कोई लड़की ब्रा और पैंटी में इतनी कयामत कैसे ढा सकती है,
एक बात तो पूरी तरह से सच लग रही थी कि मेरी शिवि उस वक्त काम की देवी लग रही थी,
मैं तुरंत ही आगे बढ़ा और उसके होंठों को किस करने लगा,
वह भी मेरे साथ लिपट गई और हम दोनों एक दूसरे के साथ किसी चुंबक की तरह चिपक गए,
मैंने उसे अपनी बांहों में उठाया और बाथरूम में ले जाकर शॉवर को चालू कर दिया,
फव्वारे से गिरती पानी की बूंदें शिवि के बदन पर इस तरह से लगने लगी थीं मानो बारिश का पानी पेड़ के पत्तों पर लग कर टपकने लगता है,
मैं शिवि की तनी हुई चूचियों को दबाने लगा,
वह आह आह करने लगी थी,
मैंने अहसास किया कि जब मैं उसकी एक चूची को अपने होंठों से दबाता हुआ चूस रहा था, उस वक्त शिवि इस तरह से मेरे जिस्म को दबा रही थी मानो आज वह मेरे बदन पर अपनी ताकत से चूर चूर कर देगी,
मगर वह एक स्त्री थी और पुरुष के बाहुबल से पिस जाना ही उसका प्रारब्ध होता है,
मैंने उसकी शक्ति को अपनी शक्ति से निर्मूल करते हुए तुरंत ही उसकी ब्रा को उसके मम्मों से उतार दिया,
ब्रा के हटते ही मैं उसकी एक चूची के निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा और अपने हाथ से उसकी दूसरी चूची को दबाते हुए मसलने लगा,
शिवि के मुख से ‘आह आह आह …’ की मादक आवाज़ आने लगी,
उसकी सिसकारियां मुझे इस क़दर से दीवाना बना रही थीं मानो मेरे लंड का पानी बिना कुछ किए ही निकल जाएगा,
शिवि अपने हाथ से मेरे लंड को दबाते हुए मरोड़ रही थी,
उसके सुकोमल हाथों से मुझे मेरा लौह दंड ऐसा महसूस करवा रहा था कि मैं जन्नत में आ गया हूँ,
कुछ पल बाद मैंने शिवि को लिटा दिया और उसे चूमने लगा,
फव्वारे से पानी की बूंदें हमारे ऊपर से बहकर बराबर नीचे आती जा रही थीं,
उसी दौरान मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया,
आज मैं शिवि जैसी खूबसूरत लड़की की चूत को पहली बार देख रहा था,
उसकी चूत बिल्कुल साफ थी, उस पर झांट का एक भी बाल नहीं था,
चिकनी चूत देख कर मुझे मदहोशी छाने लगी थी,
मैं धीरे धीरे उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा,
चूत के चारों तरफ अपनी एक उंगली को मैं इस तरह से घुमा रहा था कि शिवि की आवाज और तेज आने लगी ‘आह आह उ उउउ आह आह उउमा उम्मा …’
पूरे बाथरूम में उसकी तेज आवाज गूंजने लगी थी- आह हाय मर गई बाबू कुछ करो न … आह!
मैं भी समझ रहा था कि लड़की को तड़पाने में जितना मजा है, उतना मजा उसे चोदने में नहीं आता है,
अब मेरी एक उंगली उसकी चूत की फांक के ऊपरी हिस्से में टंके हुए उसकी मदन मणि को मसलने लगी थी,
शिवि- आह बाबू … बस करो नहीं तो मैं मर जाऊंगी … आह आह उउम उउउ उम्मम्मा …
उसकी आवाज मुझे मदहोश किए जा रही थी,
अब मैं धीरे धीरे उसके पूरे बदन को इस तरह से चाटने लगा था मानो मधुमक्खी किसी फूल के रस को चूसने लगती है,
उसकी मादक आवाज़ बहुत ही कमाल की लग रही थी,
मैंने देर ना करते हुए फिर से उसकी चूत में उंगली को अन्दर तक डाल दिया,
अपनी चूत में उंगली डलवाते ही शिवि के कंठ से जोर की आवाज निकली- आह हय अह मर गई … आह आहा आह … बेदर्दी … मत कर ना … आह,
इसके तुरंत बाद मैंने उंगली हटा कर अपनी जीभ को लगा दिया,
जीभ लगते ही शिवि की सांसें और भी तेज हो गईं मानो वह सातवें आसमान पर चली गई हो,
उसकी तीव्र होती ‘आह आह आह …’ की आवाज मेरे कानों में शहद घोलने लगी थी,
इससे मेरी भी उत्तेजना दोगुनी हो गई थी,
अब शिवि मुझसे चुदाई के लिए कहने लगी थी,
मैंने उसकी टांगों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर सैट कर दिया और उसके होंठों को चूसने लगा,
उसकी चूत की फांक पर मेरे लंड का सुपारा अपनी धमक देने लगा था, जिससे शिवि ने भी उत्तेजित होकर अपनी गांड को उठाना शुरू कर दिया था,
तभी उसका हाथ नीचे आया और उसने मेरे लंड को पकड़ कर चूत पर जमा लिया,
उसी वक्त उसकी आवाज मेरे कान में आई कि पेलो न!
मैंने कमर को हल्की सी जुंबिश दी और लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया,
वह आह करके चिल्ला पाती कि तभी मैंने अपना मुँह उसके मुँह पर कस दिया और उसी के साथ एक और धक्का दे दिया,
मेरा आधा लंड चूत में घुसता चला गया था,
कुछ देर के दर्द के बाद हम दोनों सहज हो गए और सेक्सी टीन गर्ल चुदाई शुरू हो गई,
इस तरह से हम दोनों को एक दूसरे के समाने में आधा घंटा कब निकल गया, पता ही नहीं चला,
होश तो तब आया जब हम दोनों एक लंबी दौड़ के बाद थक गए और झड़ कर निढाल हो गए,
फव्वारे का पानी हम दोनों की आग को बुझाने का काम कर रहा था,
हमारी चुदाई की कामना पूरी जरूर हो गई थी पर मन अभी भी प्यासा था,
इसलिए मैं उसके ऊपर से उठा और उसे अपनी गोदी में लेकर कमरे में आ गया,
उधर बिस्तर पर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर दूसरे दौर के लिए तैयारी करने लगे,
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